बहर में कैसे लिखें? | Shergoi

दोस्तो, आपने सोशल मीडिया पर शायरी ज़रूर सुनी होगी लेकिन अगर मैं यह कहूँ कि उनमें से ज़ियादा-तर शायरी हैं ही नहीं तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी? जी हाँ मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ क्योंकि वो वाक़ई शायरी नहीं होतीं। ऐसा इस वजह से क्योंकि अगर आप शायरी करना चाहते हैं तो आपको बहर (meter) सीखना अनवार्य है। ये पहली शर्त है शायरी करने की और इसके बाद जाके कई और टेक्निकैलिटीज़ आती हैं। सिर्फ़ चंद पंक्तियाँ लिखने से वो शायरी नहीं हो जातीं। बहर का बिलकुल सामान्य अर्थ है लय। लघु और दीर्घ मात्राओं का ऐसा रख-रखाव कि हर मिसरा (line) एक ही लय में आ जाए। आपने अगर फ़िल्मों में ग़ज़लें सुनी होंगी तो ये समझना बेहद आसान हो जाता है कि लय के लिए बहर कितनी ज़रूरी चीज़ है।

तो इसलिए आज मैं बहर में कैसे लिखें इसके कुछ तरीक़े आप तक पहुँचाने की कोशिश करूँगा। मैं बल्कि यहाँ ख़ुद आपको बे-बहर पंक्तियों से बहर में लाना सिखाऊँगा। आपको ये ब्लॉग ध्यान से पढ़ना है ताकि आप वाक़ई में शायरी कर सकें। मैं वही तरीक़े आपसे साझा करूँगा जो मैं ख़ुद अपनाता हूँ। एक बात का ध्यान रखें कि बहर में लिखना आप तभी सीख सकते हैं जब आपको अलफ़ाज़ का सही वज़्न मालूम हो।  इसके लिए (मात्रा गणना के नियम) पढ़ें।  तो चलिए शुरू करते हैं। 

ख़याल को लिखना 

जो सबसे पहला काम आपको करना है वो है अपनी डायरी में अपना ख़याल लिखना। अगर आपने दो पंक्तियाँ लिख ली हैं तो और भी बढ़िया, और अगर आप एक पंक्ति से शुरू करना चाहते हैं तो भी कोई दिक़्क़त नहीं। हमारा उद्देश्य बहर में कैसे लिखें ये सीखना है ना कि शे'र या ग़ज़ल लिखना है। ये सब तो बाद की बाते हैं। अगर आपने rhyming lines लिखी हैं तो मतला (ग़ज़ल का पहला शे'र जिसके दोनों मिसरों में क़ाफ़िया होता है) और शे'र के ढाँचे में ढालने में थोड़ा फ़र्क़ है। अगर आप ग़ज़ल से जुड़े अलफ़ाज़ के मा'नी नहीं जानते तो यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। चलिए अब दूसरे और सबसे अहम step पर चलते हैं। 

सही बहर का चुनाव और उसमें ख़याल ढालना

सबसे पहले आपको उर्दू शायरी की 32 प्रचलित बहरों की जानकारी होनी चाहिए। 

आपको अपने लिखे हुए आज़ाद ख़याल को बहर में ढालना है मगर ये हम आगे सीखेंगे। बहर का चुनाव करने के लिए सबसे पहले ये देखना है कि आपने rhyming lines लिखी हैं या शे'र के structure में लिखा है। दोनों के लिए बहर का चुनाव करने के तरीक़े में थोड़ा फ़र्क़ है। आइए समझते हैं :

Rhyming lines के लिए बहर का चुनाव

मैं ये मानके चल रहा हूँ कि आप अलफ़ाज़ का वज़्न पता कर सकते हैं क्योंकि ऊपर मैंने इसका लिंक दिया था। अब मान लीजिये आपकी rhyming lines ये हैं :

दूरियाँ हैं उसके मेरे दरमियाँ
मैं हूँ ज़मीं और वो कहकशाँ

अब ध्यान दें कि जब आख़िरी लफ़्ज़ rhyme करे तो बहर का चुनाव उसी लफ़्ज़ के आधार पर करें। 'दरमियाँ' और 'कहकशाँ' दोनों का वज़्न 212 है, यानी हम ऐसी बहर ही चुनेंगे जो 212 पर ख़त्म होती है। ऐसी कुछ बहरें हैं : 
221 2121 1221 212; 
2122 2122 2122 212; 
212 212 212 212

अब ज़रा ध्यान दीजिये जो हमने ख़याल लिखा है। साफ़-साफ़ मालूम पड़ रहा है कि उन पंक्तियों के लिए 2122 2122 2122 212 काफ़ी लंबी बहर है तो अभी के लिए हम इसे छोड़ते हैं और 221 2121 1221 212 को लेते हैं। चलिए अब इस पर set करने की कोशिश करते हैं :

221 2121 1221 212
दूरियाँ xxxxxx (नहीं बन रहा है )
हैं दूरियाँ मेरे xxxxxx (नहीं बन रहा है)

इस बहर में पंक्तियाँ बैठ नहीं रहीं उस तरह जैसा हम चाहते हैं। अब 212 212 212 212 बहर लेते हैं :

दूरियाँ तो हैं उसके मेरे दरमियाँ
मानो मैं हूँ ज़मीं और वो कहकशाँ

दूरियाँ / तो हैं उस / के मेरे / दरमियाँ
212 /212 / 212 / 212
मानो मैं / हूँ ज़मीं /और वो / कहकशाँ
212 / 212 / 212 / 212

देखिये इस बहर पर हमारा ख़याल set हो रहा है। ध्यान रखें कि कुछ लफ़्ज़ों का हेर-फेर करके आप सही बहर पर लिख लेंगे। उदाहण के तौर पर हमारे पहले ख़याल की पहली पंक्ति लें :

दूरियाँ हैं उसके मेरे दरमियाँ

212 ............ 212 

ये जिस वज़्न से शुरू हुआ उसी वज़्न से ख़त्म हुआ तो मेरे लिए बहर का चयन थोड़ा आसान हो गया। अगर पहला लफ़्ज़ न भी बैठे तो या तो आप अपनी पंक्ति को इधर-उधर करके बहर में लिख लें या कोई ऐसी बहर लें जिसका पहला रुक्न आपने पहले लफ़्ज़ से मेल खाए।

बिना Rhyming lines के लिए बहर का चुनाव


ये थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्यूँकि इसमें possibilities बहुत ज़ियादा होती हैं। यानी आप एक ख़याल को अलग अलग तरीक़े से अलग अलग बहर में लिख सकते हैं। लेकिन एक बार आपकी उर्दू vocabulary अच्छी हो जाए तो ये काफ़ी आसान हो जाता है। चलिए अब एक आज़ाद ख़याल लेते हैं और उसे बहर में ढालने की कोशिश करते हैं।

ज़िंदगी में जो भी अकेले हैं
उनसे कौन भला ख़फ़ा होगा

तो जब भी ऐसा कोई ख़याल आये तो दूसरी पंक्ति के आख़िरी लफ़्ज़/लफ़्ज़ों से बहर का चुनाव कर सकते हैं। अगर ऐसा हो कि कोई बहर न मिले या बाक़ी के ख़याल चयनित बहर में न ढले तो हमें लफ़्ज़ों का हेर-फेर करना होगा। इस मामले में शे'र के structure में लिखी पंक्तियों में ज़ियादा राहत मिलती है क्योंकि यहाँ आप पर rhyming की बंदिश नहीं होती। चलिए अब अपने आज़ाद ख़याल को बहर में ढालते हैं। 

दोनों पंक्तियाँ काफ़ी छोटी हैं इसलिए छोटी बहर ही लेते हैं। पहली पंक्ति देखिये : ज़िंदगी (212)..... अकेले हैं (122 2) ये वज़्न 2122 1212 22 बहर में आ रहा है। लेकिन दूसरी पंक्ति भी तो इसी बहर पर आनी चाहिए। आख़िरी लफ़्ज़ों को देखिए ---> ख़फ़ा होगा (12 22), यानी दोनों पंक्तियों में हेर-फेर करके 2122 1212 22 बहर में लाया जा सकता है। तो अब हमें बहर मिल गई है और अब हमें सिर्फ़ लफ़्ज़ों को उसमें ढालना है।  

ज़िंदगी में अकेले हैं जो भी

कौन उनसे भला ख़फ़ा होगा


ये सही रख-रखाव के साथ 2122 1212 22 बहर में लिखा गया है। इसकी तक़्तीअ देखें :

ज़िंदगी में / अकेले हैं / जो भी

2122 / 1212 / 22


कौन उनसे / भला ख़फ़ा / होगा

2122 / 1212 / 22


इसी तरह आप हर ख़याल को शे'र का रूप दे सकते हैं। बस आपको ऊपर की गई बातों का ख़याल रखना है ताकि बहर में लिखना आप सीख सकें। दोस्तो, एक अहम बात याद रखें कि आपको धैर्य से काम लेना है और लगातार मश्क़ करते रहना है। बहर में ख़याल ढालने में वक़्त लगता है। आज आप जिन शायरों को पढ़कर या सुनकर शायरी से प्यार करते हैं उन्होंने भी बहुत मशक़्क़त के साथ यह कला सीखी है।


उम्मीद करता हूँ इस ब्लॉग पोस्ट से आपको कुछ न कुछ ज़रूर सीखने को मिला होगा। अगर आप अभी अभी ग़ज़लें कहना शुरू कर रहे हैं तो आप इस ब्लॉग पर published posts ज़रूर पढ़ें। मैंने सभी ज़रूरी topics cover किए हैं।


शुक्रिया।